Thursday, April 3, 2008

ख्वाइश

ख्वाइश

दूरियाँ घट जायेगी नजदिकिया बढ जायेगी
एक दिन ऐसा भी आएगा जब याद तुझे मेरी आएगी

ख्वाबो में तेरे आयुँगा तुझे सारी रात सताऊंगा
अब तक तडपाया है तुने , अब में तुझको तडपाउंगा
जुल्फों से तेरी खेलुगा बाहों में तुझको ले लूँगा
गीतों की नग्म बना दूंगा नग्मो से तुझे सजा दूँगा
सोच के ये रुस्वाई भी तब आँख तेरी भर आएगी
एक दिन ऐसा भी आएगा जब याद तुझे मेरी आएगी



दिल के दर्द को कब तक hmmm.. हमसे तुम यूं छुपाओगे
पास तुम्हारे हम होगे पर तुमको नज़र न आयेगे
सपनो का सौदागर बनकर सपनो से तेरे खेलूँगा
तुझे खुशिया अपनी दे दूंगा तेरे गम सारे में ले लूँगा
वो पल होगा जब याद मेरी पागल तुमको कर जायेगी
एक दिन ऐसा भी आएगा जब याद तुझे मेरी आएगी..

AJ...
अंकित जैन